जी हाँ कोनसोच रहा है समाज के बारे मैं, नेता, ब्यापारी, सरकार, पत्रकार, या शायद कोई नही !
क्यों ?
क्योंकि किसी को भी इतनी फुर्सत नही की समाज के बारे मैं सोचे। सब अपने बारे मैं सोच रहे हैं।
नेता अपना घर भरने मैं लगे हैं। सोचते हैं क्या पता अगली बार सरकार आए या नही। जितना नोच सकते हैं नोच लो ।
व्यापारी कालाबाजारी मिलावटी सामान से अपना उल्लू सीधा कर रहे है । समाज मैं लोग मरते हैं तो मरें।
सरकार ने महगाई बढ़ाकर गरीबों की दो जून की रोटी भी छीन ली। लोग भूके पेट सोते है तो सोयें।
पत्रकार पत्रकार नही रहा। व्यापारी बन गया हैं। विज्ञापन देने वाले कुछ भी ग़लत करें लेकिन उनके खिलाफ नही छापेगा। क्योकि अखबार मालिक को धंधा चाहिए
शायद इनमे से कोई समाज के बारे मैं नही सोचेगा। अब ख़ुद समाज, जनता को अपने बारे मैं सोचना पड़ेगा। जनता अगर अब अपने बारे मैं नही सोचेगी तो ये सुब मिलकर देश को फ़िर से अंग्रेजों का गुलाम बना देंगे।
Friday, September 25, 2009
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Sriman ji,
ReplyDeletesamaj vargiy hota hai jis varg ki satta hai uske ye sab saare gun hai jaroorat hai mehnatkash logo ko jansangharsh karne ki.
aapka lekh accha laga.
nice
रफ़्तार के इस दौर में किसी के भी पास सोचने की फुर्सत कहां है भाई..
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